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India-UK Trade Deal में स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स छूट को लेकर विवाद, 2 नवंबर को कंपनियों से बात करेगी सरकार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में स्कॉच व्हिस्की के आयात शुल्क को लेकर विवाद गहराया। 2 नवंबर को केंद्र सरकार विदेशी और भारतीय शराब कंपनियों के साथ बैठक करेगी।

 भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन को लेकर स्कॉच व्हिस्की के आयात शुल्क पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में अब केवल विदेशी शराब कंपनियां ही नहीं, बल्कि भारतीय शराब निर्माता कंपनियां भी सरकार के सामने अपनी चिंताएं रख रही हैं। बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार, 2 नवंबर को शराब उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का फैसला किया है।


रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में विदेशी और घरेलू कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। चर्चा का मुख्य मुद्दा थोक में आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की पर कम आयात शुल्क का लाभ देने से जुड़ा होगा।


150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी हुआ था आयात शुल्क


भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू हुआ था। इसके तहत पात्र स्कॉच व्हिस्की उत्पादों पर आयात शुल्क 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी करने पर सहमति बनी थी। आगे इसे अगले दस वर्षों में घटाकर 40 फीसदी तक लाने का प्रावधान भी है।


हालांकि, विवाद तब सामने आया जब भारतीय अधिकारियों ने बड़ी शराब कंपनियों को संकेत दिया कि थोक में आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की को इस रियायत के दायरे में नहीं माना जा रहा है। इसी व्याख्या को लेकर विदेशी कंपनियों और उद्योग संगठनों ने सवाल उठाए हैं।


विदेशी कंपनियों के बाद भारतीय कंपनियां भी सामने आईं


शुरुआत में डियाजियो और पर्नो रिकार्ड जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने इस मामले पर आपत्ति जताई थी। इन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) ने सरकार को आगाह किया था कि थोक स्कॉच को शुल्क में छूट से बाहर रखने पर व्यापार समझौते का अपेक्षित लाभ प्रभावित हो सकता है।


अब कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) ने भी इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखा है। 27 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में संगठन ने कहा कि थोक स्कॉच पर अधिक शुल्क जारी रहने से भारत में शराब का उत्पादन करने वाली कंपनियों की लागत और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।


संगठन की दलील है कि यदि भारत में उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली थोक स्कॉच महंगी पड़ती है, तो कंपनियों के लिए विदेश से तैयार शराब आयात करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों पर असर पड़ने की आशंका है।


80 फीसदी स्कॉच थोक में भारत पहुंचती है


इस विवाद का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि ब्रिटेन से भारत आने वाली स्कॉच व्हिस्की का लगभग 80 फीसदी हिस्सा मात्रा के हिसाब से थोक में आयात किया जाता है। भारतीय निर्माता इसका इस्तेमाल अपने विभिन्न ब्रांडों के उत्पादन और मिश्रण तैयार करने में करते हैं।


भारत का शराब बाजार करीब 65 अरब डॉलर का बताया गया है। इस उद्योग में विदेशी आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन और वितरण से जुड़ी कंपनियों की भी बड़ी हिस्सेदारी है।


CIABC से जुड़ी कंपनियों में रेडिको खेतान और एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हैं। रेडिको खेतान का प्रमुख ब्रांड 8PM है, जबकि एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ऑफिसर्स चॉइस ब्रांड के लिए जानी जाती है।


एलाइड ब्लेंडर्स ने निवेशकों को दी गई अपनी जानकारी में खुद को थोक स्कॉच के बड़े आयातकों में शामिल बताया है। कंपनी को उम्मीद है कि ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते से उसके प्रीमियम शराब कारोबार को लाभ मिल सकता है।


ब्रिटेन और स्कॉटलैंड ने भी उठाया मुद्दा


इस विवाद पर ब्रिटेन की ओर से भी भारत के साथ बातचीत की बात कही गई है। स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री जॉन स्विनी ने 20 से 27 अक्टूबर के भारत दौरे के दौरान थोक स्कॉच के साथ किए जा रहे व्यवहार का मुद्दा भारतीय पक्ष के सामने उठाया था।


ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि वह इस विषय पर भारत के साथ मिलकर समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भारत सरकार की तरफ से अब तक इस विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


अब सभी की नजर 2 नवंबर को होने वाली बैठक पर है। इस बातचीत में यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत थोक स्कॉच व्हिस्की को आयात शुल्क में मिली रियायत का लाभ मिलेगा या नहीं। इसका असर विदेशी कंपनियों के साथ भारतीय शराब उद्योग की उत्पादन लागत और व्यापारिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।


यह भी पढ़ें: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से जुड़े अन्य अपडेट के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।


पूरी खबर पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।

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